NCERT Removes Constitution Preamble: NCERT ने कक्षा 9 की नई सोशल साइंस की किताब में कई बड़े बदलाव किए हैं। नई पुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond – Part 1’ को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत तैयार किया गया है। इसमें इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र को एकीकृत रूप में पढ़ाया जाएगा।
नई किताब का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बदलाव यह है कि शुरुआती अध्याय से भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को हटा दिया गया है। इसके साथ ही प्रस्तावना में मौजूद ‘सोशलिस्ट (समाजवादी)’ और ‘सेक्युलर (पंथनिरपेक्ष)’ जैसे शब्दों की अलग से व्याख्या भी इस अध्याय में नहीं दी गई है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि संविधान से ये शब्द हटा दिए गए हैं। ये शब्द आज भी भारतीय संविधान का हिस्सा हैं।
इसी किताब में पहली बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR), 1975 की इमरजेंसी, चुनाव आयोग, मतदाता सूची, मनुस्मृति का श्लोक, लोकतंत्र की चुनौतियां और मीडिया की भूमिका जैसे कई नए विषय भी जोड़े गए हैं।

NCERT Removes Constitution Preamble: संविधान की प्रस्तावना क्यों हटाई गई?
नई किताब के शुरुआती अध्याय में पहले की तरह संविधान की प्रस्तावना नहीं दी गई है। इसके बजाय संविधान के मूल सिद्धांतों, लोकतांत्रिक संस्थाओं, मौलिक अधिकारों और शासन व्यवस्था को अलग तरीके से समझाया गया है।
पहले की किताबों में प्रस्तावना के माध्यम से सॉवरेन (संप्रभु), सोशलिस्ट (समाजवादी), सेक्युलर (पंथनिरपेक्ष), डेमोक्रेटिक (लोकतांत्रिक) और रिपब्लिक (गणराज्य) जैसे शब्दों की व्याख्या की जाती थी। नई पुस्तक में इन शब्दों की अलग-अलग विस्तृत चर्चा मुख्य अध्याय में नहीं की गई है।
हालांकि संविधान में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 1976 के 42वें संविधान संशोधन के बाद जो सोशलिस्ट, सेक्युलर और इंटीग्रिटी (अखंडता) शब्द प्रस्तावना में जोड़े गए थे, वे आज भी संविधान का हिस्सा बने हुए हैं।
इन शब्दों का क्या अर्थ होता है?
पुस्तक में इन शब्दों की विस्तृत व्याख्या नहीं दी गई है, लेकिन इनका अर्थ समझना जरूरी है।
सॉवरेन (संप्रभु) का अर्थ है कि भारत पूरी तरह स्वतंत्र देश है और अपने सभी फैसले स्वयं लेता है।
सोशलिस्ट (समाजवादी) का मतलब है कि राज्य ऐसा समाज बनाने का प्रयास करेगा जहां सभी नागरिकों को समान अवसर मिलें और आर्थिक असमानता कम हो।
सेक्युलर (पंथनिरपेक्ष) का अर्थ है कि भारत का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है और सरकार सभी धर्मों को समान सम्मान और संरक्षण देती है।
डेमोक्रेटिक (लोकतांत्रिक) का मतलब है कि देश की सर्वोच्च शक्ति जनता के पास होती है और सरकार जनता द्वारा चुनी जाती है।
रिपब्लिक (गणराज्य) का अर्थ है कि देश का प्रमुख वंशानुगत राजा नहीं बल्कि जनता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चुना गया व्यक्ति होता है।

SIR क्या है और इसे किताब में क्यों जोड़ा गया?
नई किताब में पहली बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision-SIR) को भी शामिल किया गया है।
किताब के अनुसार SIR का उद्देश्य मतदाता सूची (Electoral Roll) को अद्यतन रखना, मतदाताओं का सत्यापन करना तथा मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करना है।
छात्रों को समझाया गया है कि यदि मतदाता सूची सही और अद्यतन रहेगी तो चुनाव अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी होंगे। पुस्तक में यह भी बताया गया है कि मतदाता सूची का समय-समय पर निरीक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर नया अध्याय
नई NCERT पुस्तक में पहली बार चुनाव आयोग (Election Commission of India) और चुनावी प्रक्रिया पर अलग अध्याय जोड़ा गया है।
इसमें बताया गया है कि भारत में चुनाव कराना दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक कार्यों में से एक है। वर्ष 2024 में देश में लगभग 96.8 करोड़ मतदाता थे। इतनी बड़ी आबादी के बीच निष्पक्ष चुनाव कराना अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती है।
किताब बताती है कि चुनाव आयोग Representation of the People Act (RPA), आदर्श आचार संहिता, EVM, VVPAT और मतदाता जागरूकता अभियान के जरिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने का प्रयास करता है।
साथ ही छात्रों को यह भी समझाया गया है कि केवल चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर्याप्त नहीं है। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।
इमरजेंसी पर नया चैप्टर
नई पुस्तक में पहली बार 1975-77 की राष्ट्रीय इमरजेंसी पर अलग अध्याय शामिल किया गया है। पुस्तक में इसे स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। किताब के अनुसार 1970 के दशक की शुरुआत में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक समस्याओं के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ने लगा था।
इसके बाद 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रायबरेली चुनाव मामले में इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया और उन्हें छह वर्षों तक चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित कर दिया। इसके कुछ ही दिनों बाद 25 जून 1975 को देश में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए राष्ट्रीय आपातकाल लागू कर दिया गया। यह आपातकाल 21 मार्च 1977 तक चला।

आपातकाल के दौरान क्या हुआ?
नई किताब में बताया गया है कि आपातकाल के दौरान कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए। प्रेस पर सेंसरशिप लागू हुई और सरकार की आलोचना करने वाली खबरों के प्रकाशन पर रोक लगा दी गई।
जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी समेत अनेक विपक्षी नेताओं और हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
संजय गांधी के नेतृत्व में परिवार नियोजन अभियान के दौरान कई स्थानों पर जबरन नसबंदी के आरोप भी लगे, जिससे जनता में भारी असंतोष पैदा हुआ।
इसी अवधि में 42वां संविधान संशोधन पारित किया गया जिसे भारतीय संविधान के सबसे बड़े संशोधनों में से एक माना जाता है।
जयप्रकाश नारायण आंदोलन का विशेष उल्लेख
नई पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को विस्तार से शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने छात्रों और आम नागरिकों को संगठित किया तथा बिहार और गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े किए।
किताब के अनुसार 1977 में जब इमरजेंसी समाप्त हुई और आम चुनाव हुए, तब जनता ने मतदान के जरिए सत्ता परिवर्तन किया। इसे भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
लोकतंत्र के सामने नई चुनौतियां
नई किताब केवल इमरजेंसी तक सीमित नहीं रहती बल्कि आधुनिक लोकतंत्र की चुनौतियों पर भी चर्चा करती है। इसमें फेक न्यूज, गलत सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव, लैंगिक असमानता जैसी समस्याओं को लोकतंत्र के सामने मौजूद महत्वपूर्ण चुनौतियों के रूप में बताया गया है।
‘Democracy and You’ नया सेक्शन
NCERT ने पहली बार “Democracy and You” नाम से नया सेक्शन जोड़ा है। इसका उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि लोकतंत्र केवल सरकार का विषय नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी भी है। मतदान, जनभागीदारी, जागरूकता और संविधान के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों पर विशेष जोर दिया गया है।
मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताया
नई पुस्तक में मीडिया की भूमिका पर भी अलग सेक्शन शामिल किया गया है। इसमें मीडिया को लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ बताया गया है और कहा गया है कि स्वतंत्र मीडिया जनता की आवाज उठाने, सरकार की जवाबदेही तय करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मनुस्मृति का श्लोक क्यों जोड़ा गया?
नई सोशल साइंस पुस्तक में वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति समझाने के लिए मनुस्मृति (अध्याय 3, श्लोक 56) का उल्लेख किया गया है।

इस श्लोक में कहा गया है—
“जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता प्रसन्न होते हैं और जहां उनका सम्मान नहीं होता, वहां सभी धार्मिक कार्य निष्फल हो जाते हैं।”
किताब में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वैदिक काल में महिलाओं को शिक्षा, धार्मिक अनुष्ठानों और सार्वजनिक जीवन में भाग लेने के अवसर प्राप्त थे।
ऋग्वेद की महिला ऋषियों अपाला, विश्ववारा, घोषा और लोपामुद्रा का भी उल्लेख किया गया है।
साथ ही ऋग्वेद के उस मंत्र का उदाहरण भी दिया गया है जिसमें एक व्यक्ति कहता है—
“मैं कवि हूं, मेरे पिता वैद्य हैं और मेरी माता अनाज पीसने का कार्य करती हैं।”
इसके माध्यम से बताया गया है कि वैदिक समाज में एक ही परिवार के लोग अलग-अलग व्यवसाय करते थे।
राजनीतिक दलों और चुनाव पर क्या पढ़ाया जाएगा?
नई किताब में छात्रों को यह भी बताया गया है कि राजनीतिक दल लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
वे अलग-अलग नीतियां और विचार जनता के सामने रखते हैं, जिससे मतदाता अपनी पसंद की सरकार चुनते हैं।
छात्रों को 1977 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनावों में विजयी गठबंधनों का अध्ययन करने का भी निर्देश दिया गया है।
NCERT ने नकली किताबों को लेकर भी चेतावनी दी
नई किताबों को लेकर बढ़ती मांग के बीच NCERT ने छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों से केवल अधिकृत प्रकाशकों की किताबें खरीदने की अपील की है।
संस्था ने कहा है कि नकली और पायरेटेड किताबों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। गलत और अधूरी जानकारी से बचने के लिए केवल आधिकारिक संस्करण का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
नई NCERT सोशल साइंस पुस्तक केवल पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं बल्कि नागरिक शिक्षा (Civic Education) के नए दृष्टिकोण को भी दर्शाती है। इसमें संविधान, लोकतंत्र, चुनाव आयोग, मतदाता सूची, इमरजेंसी, मीडिया, महिलाओं की स्थिति और लोकतांत्रिक भागीदारी जैसे विषयों को नए तरीके से प्रस्तुत किया गया है। हालांकि संविधान की प्रस्तावना को शुरुआती अध्याय से हटाने और सोशलिस्ट-सेक्युलर शब्दों का उल्लेख न करने को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक बहस भी शुरू हो गई है। आने वाले समय में यह बदलाव शिक्षा और सार्वजनिक विमर्श दोनों में चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।
FAQs:
नई पुस्तक में प्रस्तावना को शुरुआती अध्याय से हटाकर संविधान के सिद्धांतों और संस्थाओं की व्याख्या अलग तरीके से की गई है। संविधान से प्रस्तावना हटाई नहीं गई है।
ये बदलाव NCERT की कक्षा 9 की नई सोशल साइंस पुस्तक में किए गए हैं।
नहीं। ये शब्द आज भी भारतीय संविधान की प्रस्तावना का हिस्सा हैं। नई किताब में केवल इनका अलग से उल्लेख नहीं किया गया है।
SIR, चुनाव आयोग, इमरजेंसी, मीडिया, लोकतंत्र की चुनौतियां, मनुस्मृति का श्लोक, वैदिक काल में महिलाओं की स्थिति और ‘Democracy and You’ जैसे नए सेक्शन जोड़े गए हैं।
किताब में कहा गया है कि भारत में चुनाव कराना दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक कार्यों में से एक है और चुनाव आयोग EVM, VVPAT, RPA कानून तथा मतदाता जागरूकता अभियानों के जरिए निष्पक्ष चुनाव कराने का प्रयास करता है।

